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सरकारी परीक्षा में श्रुतलेखक और अतिरिक्त समय — कौन पात्र है, और वे नियम जो अभ्यर्थन रद्द कराते हैं
Sarkari Naukri Khabar • अखिल भारतीय
जो अभ्यर्थी स्वयं पेपर नहीं लिख सकता, वह श्रुतलेखक ले जा सकता है, और परीक्षा के हर घंटे पर बीस मिनट अतिरिक्त समय भी मांग सकता है। दोनों ऑनलाइन आवेदन में ही मांगने होते हैं: परीक्षा वाले दिन कोई काउंटर नहीं होता जहां इन्हें जोड़ा जा सके। श्रुतलेखक से जुड़े नियम इतने कड़े हैं कि अभ्यर्थन रद्द हो सकता है, और एक नियम उन लोगों को पकड़ता है जो केवल मदद कर रहे होते हैं, क्योंकि उसी परीक्षा में बैठ रहा अभ्यर्थी किसी और का श्रुतलेखक नहीं बन सकता। यह गाइड बताती है कि आरआरबी अपने CEN 04/2026 में क्या छापता है, और पाठक को अपनी अधिसूचना में क्या देखना चाहिए।
यह क्या है, और ये नियम कहां से आते हैं
श्रुतलेखक, जिसे लेखन सहायक भी कहा जाता है, वह व्यक्ति है जो परीक्षा में अभ्यर्थी की ओर से उत्तर लिखता है। अतिरिक्त समय उसी परीक्षा में मिलने वाला अधिक समय है।
नीचे लिखी हर बात वही है जो रेलवे भर्ती बोर्ड अपने CEN 04/2026 में पैरा 11.7.1 से 11.7.9.2 तक छापते हैं। वह एक चालू भर्ती है और वह दस्तावेज़ कोई भी पढ़ सकता है, इसीलिए यहां कानून के सारांश के बजाय उसी को आधार बनाया गया है।
सिद्धांत लगभग सभी भर्ती संस्थाओं में एक जैसा है, क्योंकि वह केंद्रीय दिशानिर्देशों से आता है, आरआरबी से नहीं। प्रक्रिया एक जैसी नहीं है। आरआरबी श्रुतलेखक से अपने पोर्टल पर पंजीकरण कराता है और ओटीपी से पुष्टि कराता है, और इस साइट पर मौजूद कोई दूसरी संस्था ऐसा नहीं करती। इसलिए नीचे के पैरा से बात की बनावट समझिए, और अपनी परीक्षा की प्रक्रिया अपनी अधिसूचना में पढ़िए।
श्रुतलेखक किसे मिल सकता है
तीन अलग रास्ते हैं, और तीनों अलग प्रमाण मांगते हैं।
- दृष्टिहीनता, दोनों बांहों से प्रभावित चलन-दिव्यांगता, या सेरेब्रल पाल्सी की बेंचमार्क दिव्यांगता: अभ्यर्थी चाहे तो श्रुतलेखक की सुविधा दी जाती है। पात्रता के लिए इससे आगे कुछ नहीं मांगा जाता।
- कोई अन्य बेंचमार्क दिव्यांगता: श्रुतलेखक तब मिलता है जब यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत हो कि व्यक्ति को लिखने में शारीरिक सीमा है और श्रुतलेखक आवश्यक है। यह प्रमाण पत्र किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन या चिकित्सा अधीक्षक से होना चाहिए।
- 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता, पर लिखने में कठिनाई: तब भी श्रुतलेखक मिल सकता है। आरआरबी इसका स्पष्ट प्रावधान करता है, अपने निर्धारित प्रमाण पत्र और घोषणा-पत्र पर। यही वह रास्ता है जिसके बारे में अधिकांश लोगों को पता ही नहीं होता।
चालीस प्रतिशत वाली रेखा, और इसका अर्थ क्या नहीं है
यहां दो नियम पास-पास हैं और आपस में गड्डमड्ड हो जाते हैं।
आरआरबी लिखता है कि एक आंख वाले सभी अभ्यर्थी, तथा जिनकी दृष्टि-दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम है, दृष्टिबाधित नहीं माने जाएंगे। इससे यह तय होता है कि व्यक्ति बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी में गिना जाएगा या नहीं, और उसका असर आरक्षण पर पड़ता है।
इससे श्रुतलेखक का दरवाज़ा बंद नहीं होता। 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले उन अभ्यर्थियों के लिए अलग प्रावधान बना हुआ है जिन्हें लिखने में कठिनाई है, अपने प्रमाण पत्र और घोषणा-पत्र के साथ। बेंचमार्क श्रेणी से बाहर होना और लिखने में सहायता की ज़रूरत होना दो अलग प्रश्न हैं, और अधिसूचना उनका उत्तर अलग-अलग देती है।
व्यावहारिक बात: यह मत मान लीजिए कि प्रमाण पत्र में 40 प्रतिशत से कम लिखा है इसलिए श्रुतलेखक नहीं मिलेगा। केवल श्रेणी वाला पैरा नहीं, लिखने की कठिनाई वाला पैरा भी पढ़िए।
हर घंटे बीस मिनट, और यह श्रुतलेखक के बिना भी लिया जा सकता है
जिस अभ्यर्थी को श्रुतलेखक की अनुमति है, उसे परीक्षा के हर घंटे पर बीस मिनट अतिरिक्त समय मिलता है।
और अब वह बात जो सचमुच कम लोगों को पता है। जो अभ्यर्थी श्रुतलेखक के लिए पात्र है पर उसे लेना नहीं चाहता, उसे भी चाहने पर वही बीस मिनट प्रति घंटा दिया जा सकता है।
यानी जो अभ्यर्थी धीरे लिखता है पर अपना पेपर खुद लिखना चाहता है, उसे मदद और बिना-मदद में से चुनना नहीं है। वह श्रुतलेखक मना करके अतिरिक्त समय रख सकता है। दो घंटे के पेपर पर यह चालीस मिनट होता है।
यह मांगना पड़ता है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने भर से यह अपने आप नहीं लगता।
यह आवेदन में मांगा जाता है, परीक्षा वाले दिन नहीं
यहीं अभ्यर्थी यह सुविधा गंवाते हैं, और पूरे खंड में यही नियम सबसे कम रियायत देता है।
जो पात्र अभ्यर्थी श्रुतलेखक लेना चाहता है, उसे ऑनलाइन आवेदन में ही श्रुतलेखक का विकल्प चुनना होगा। बाद में केंद्र पर इसकी व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं है, और परीक्षा हॉल में ऐसा कोई काउंटर नहीं होता जो इसे जोड़ सके।
इसके बाद आरआरबी श्रुतलेखक का विवरण अलग से मांगता है, संशोधन विंडो बंद होने के तुरंत बाद खुलने वाली पांच दिन की विंडो में। अभ्यर्थी लॉगिन करता है, श्रुतलेखक की पंजीकरण संख्या डालता है, और श्रुतलेखक के मोबाइल पर आए ओटीपी से पुष्टि करता है।
यह एक नहीं, दो समय-सीमाएं हैं, और दूसरी फॉर्म बंद होने के हफ्तों बाद आती है। आवेदन वाले दिन ही दोनों फोन में लिख लीजिए। यूपीएसएसएससी ओटीआर पर हमारी गाइड इसी जाल को दूसरी व्यवस्था में बताती है: जो सुविधा आपने चुनी नहीं, वह आपके पास है ही नहीं।
श्रुतलेखक आपको खोजना है, और पंजीकरण भी कराना है
पात्र अभ्यर्थी को श्रुतलेखक स्वयं, अपने खर्च पर व्यवस्थित करना होता है। भर्ती संस्था श्रुतलेखक नहीं देती।
आरआरबी के लिए, जो व्यक्ति श्रुतलेखक बनेगा उसे rrbapply.gov.in पर अपना खाता बनाकर वहीं श्रुतलेखक के रूप में पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण संख्या बनती है और श्रुतलेखक के मोबाइल पर जाती है, और पुष्टि पूरी करने के लिए अभ्यर्थी को वही संख्या चाहिए।
श्रुतलेखक के लिए अलग बुलावा पत्र जारी होता है, और परीक्षा वाले दिन श्रुतलेखक को वही मूल पहचान दस्तावेज़ साथ लाना होता है जो पंजीकरण में दिया था।
इनमें से कुछ भी एक रात पहले नहीं हो सकता। व्यक्ति जल्दी खोजिए, और विंडो खुली रहते पंजीकरण करा लीजिए।
वे नियम जो अभ्यर्थन समाप्त कर देते हैं
ये अधिसूचना में साफ लिखे हैं, और इनके परिणाम श्रुतलेखक से कम अभ्यर्थी पर नहीं पड़ते।
- जो अभ्यर्थी पात्र नहीं है और फिर भी श्रुतलेखक या अतिरिक्त समय लेता है, वह भर्ती से अयोग्य हो जाता है। यदि यह बात नियुक्ति के बाद सामने आए, तो अधिसूचना के अनुसार व्यक्ति को बिना सूचना सेवा से हटाया जा सकता है।
- एक श्रुतलेखक उसी परीक्षा में एक से अधिक अभ्यर्थी की सहायता नहीं कर सकता।
- उसी परीक्षा में बैठ रहा अभ्यर्थी किसी दूसरे अभ्यर्थी का श्रुतलेखक नहीं बन सकता। दोनों को इसकी घोषणा देनी होती है, और बाद में पकड़े जाने पर दोनों का अभ्यर्थन रद्द होता है। यही वह नियम है जो केवल मित्र की मदद कर रहे लोगों को पकड़ता है।
- श्रुतलेखक की शैक्षणिक योग्यता परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी की योग्यता से एक स्तर नीचे होनी चाहिए।
- यदि श्रुतलेखक प्रतिरूपणकर्ता निकले, या उसके बारे में दी गई कोई जानकारी गलत निकले, तो पूरी ज़िम्मेदारी अभ्यर्थी की मानी जाती है और अभ्यर्थन रद्द होता है।
- यदि परीक्षा के दौरान कभी भी यह पाया जाए कि श्रुतलेखक स्वयं प्रश्न हल कर रहा है, तो उस अभ्यर्थी का सत्र समाप्त कर दिया जाता है और अभ्यर्थन रद्द होता है। परीक्षा के बाद परीक्षा-संचालक की रिपोर्ट पर भी यही लागू होता है।
क्या करना है, किस क्रम में
यदि इनमें से कुछ आप पर लागू होता है, तो विवरण से अधिक क्रम मायने रखता है।
- फॉर्म भरने से पहले अपनी अधिसूचना का श्रुतलेखक वाला पैरा पढ़िए। CEN 04/2026 में यह 11.7 है; हर संस्था का क्रमांक अलग होता है।
- तय कीजिए कि आप तीन में से किस रास्ते पर आते हैं, और उसी रास्ते का प्रमाण पत्र, अधिसूचना के निर्धारित प्रारूप पर बनवाइए।
- श्रुतलेखक चाहिए तो ऑनलाइन आवेदन में उसका विकल्प चुनिए, और अतिरिक्त समय श्रुतलेखक लें या न लें, तब भी मांगिए।
- श्रुतलेखक जल्दी खोजिए, उसकी योग्यता अपनी योग्यता से एक स्तर नीचे है यह देखिए, और यह पक्का कीजिए कि वह उसी परीक्षा में नहीं बैठ रहा।
- अधिसूचना जो विंडो देती है उसी के भीतर श्रुतलेखक का पंजीकरण और पुष्टि करा लीजिए, जो आरआरबी में संशोधन विंडो बंद होने के बाद पांच दिन की होती है।
- प्रमाण पत्र, घोषणा-पत्र और श्रुतलेखक का मूल पहचान दस्तावेज़ केंद्र पर साथ ले जाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरकारी परीक्षा में श्रुतलेखक किसे मिल सकता है?
आरआरबी अपने CEN 04/2026 में तीन रास्ते बताता है: बेंचमार्क दृष्टिहीनता, दोनों बांहों से प्रभावित चलन-दिव्यांगता या सेरेब्रल पाल्सी वाले अभ्यर्थियों को मांगने पर श्रुतलेखक मिलता है; अन्य बेंचमार्क दिव्यांगता के लिए किसी सरकारी संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल सर्जन या चिकित्सा अधीक्षक का प्रमाण पत्र चाहिए जिसमें लिखने की शारीरिक सीमा दर्ज हो; और 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले जिन्हें लिखने में कठिनाई है, वे भी निर्धारित प्रमाण पत्र और घोषणा-पत्र पर श्रुतलेखक ले सकते हैं।
अतिरिक्त समय कितना मिलता है?
जिन अभ्यर्थियों को श्रुतलेखक की अनुमति है, उन्हें परीक्षा के हर घंटे पर बीस मिनट। दो घंटे के पेपर पर यह चालीस मिनट हुआ।
क्या श्रुतलेखक लिए बिना अतिरिक्त समय मिल सकता है?
हां। आरआरबी लिखता है कि जो अभ्यर्थी श्रुतलेखक के पात्र हैं पर उसे लेना नहीं चाहते, उन्हें भी चाहने पर बीस मिनट प्रति घंटा अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। यह मांगना पड़ता है, अपने आप नहीं लगता।
क्या परीक्षा वाले दिन श्रुतलेखक की व्यवस्था हो सकती है?
नहीं। श्रुतलेखक का विकल्प ऑनलाइन आवेदन में ही चुनना होता है, और उसके बाद आरआरबी श्रुतलेखक का विवरण उस पांच दिन की विंडो में मांगता है जो संशोधन विंडो बंद होने के बाद खुलती है। परीक्षा केंद्र पर ऐसा कोई काउंटर नहीं होता जो इसे जोड़ सके।
क्या श्रुतलेखक भर्ती संस्था देती है?
नहीं। अभ्यर्थी स्वयं, अपने खर्च पर श्रुतलेखक की व्यवस्था करता है। आरआरबी में श्रुतलेखक को rrbapply.gov.in पर पंजीकरण भी कराना होता है, और अभ्यर्थी उसके मोबाइल पर आए ओटीपी से पुष्टि करता है।
क्या उसी परीक्षा में बैठ रहा मेरा मित्र मेरा श्रुतलेखक बन सकता है?
नहीं, और इससे दोनों का अभ्यर्थन रद्द होता है। उसी परीक्षा में आवेदन करने वाला अभ्यर्थी किसी और का श्रुतलेखक नहीं बन सकता, दोनों को इसकी घोषणा देनी होती है, और किसी भी चरण में पकड़े जाने पर दोनों अभ्यर्थी रद्द कर दिए जाते हैं।
श्रुतलेखक की योग्यता क्या होनी चाहिए?
श्रुतलेखक की शैक्षणिक योग्यता परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी की योग्यता से एक स्तर नीचे होनी चाहिए।
ℹ️ सरकारी नियम, शुल्क और समय-सीमा बदल सकते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने प्रखंड कार्यालय से वर्तमान स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें।
अंतिम अपडेट: 01 सितंबर 2026