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SIR दस्तावेज़ सूची: कौन से कागज़ चाहिए, यह आपकी जन्म तिथि से तय होता है
Sarkari Naukri Khabar • अखिल भारतीय
SIR में ज़्यादातर मतदाताओं को कोई दस्तावेज़ दिखाना ही नहीं पड़ता: यदि आपका या माता-पिता का नाम पिछली SIR सूची से जुड़ जाता है, तो गणना प्रपत्र ही काफ़ी है। दस्तावेज़ तभी मांगे जाते हैं जब यह जुड़ाव न मिलने पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नोटिस भेजते हैं। तब आधिकारिक प्रपत्र पर छपा नियम आपकी जन्म तिथि से तय होता है: 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे हैं तो अपनी जन्म तिथि या जन्म स्थान साबित करें; बाद में जन्मे हैं तो माता या पिता, या दोनों के दस्तावेज़ भी लग सकते हैं। यह गाइड वह नियम, तेरह दस्तावेज़ों की आधिकारिक सूची, और आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने ठीक-ठीक क्या कहा, यह बताती है।
पहले: हो सकता है आपको कोई दस्तावेज़ ही न लगे
गणना प्रपत्र के साथ छपी आधिकारिक सूचना पत्रिका कहती है कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) उन मतदाताओं को नोटिस देंगे जिनका प्रपत्र में दिया गया पिछली SIR सूची का विवरण या तो उपलब्ध नहीं है या डेटाबेस से मेल नहीं खाता। दस्तावेज़ उस नोटिस के बाद मांगे जाते हैं, पहले नहीं।
इसलिए पहला काम है प्रपत्र का पिछले SIR वाला भाग अपनी या किसी संबंधी की प्रविष्टि से सही भरना। यदि यह जुड़ाव मिल जाता है, तो दस्तावेज़ों का सवाल ही नहीं उठता। गणना प्रपत्र भरने पर हमारी गाइड देखें।
नियम: यह आपकी जन्म तिथि पर निर्भर है
यदि आपको नोटिस मिलता है, तो सूचना पत्रिका जन्म तिथि के आधार पर बताती है कि कौन से दस्तावेज़ देने हैं। तिथियां एक-एक दिन तक मायने रखती हैं।
- भारत में 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे: अपने लिए कोई एक दस्तावेज़, जो आपकी जन्म तिथि और/या जन्म स्थान साबित करे।
- भारत में 1 जुलाई 1987 और 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे: एक दस्तावेज़ अपने लिए, और एक दस्तावेज़ पिता या माता के लिए, हर एक जन्म तिथि और/या जन्म स्थान साबित करे।
- भारत में 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे: एक दस्तावेज़ अपने लिए, एक पिता के लिए, और एक माता के लिए। यदि माता या पिता भारतीय नहीं हैं, तो आपके जन्म के समय का उनका वैध पासपोर्ट और वीज़ा की प्रति।
- भारत के बाहर जन्मे: विदेश स्थित भारतीय मिशन द्वारा जारी जन्म पंजीकरण का प्रमाण।
- पंजीकरण या देशीयकरण से भारतीय नागरिक: नागरिकता पंजीकरण का प्रमाण पत्र।
दस्तावेज़ों की आधिकारिक सूची
प्रपत्र इसे सांकेतिक सूची कहता है, पूरी नहीं। जहां ऊपर का नियम मांगे, वहां अपने, पिता और माता के लिए अलग-अलग स्व-सत्यापित दस्तावेज़ देने हैं।
- 1. केंद्र सरकार, राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी कोई पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश।
- 2. 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में सरकार, स्थानीय निकायों, बैंकों, डाकघर, LIC या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी कोई पहचान पत्र, प्रमाण पत्र या दस्तावेज़।
- 3. सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
- 4. पासपोर्ट।
- 5. मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक या शैक्षणिक प्रमाण पत्र।
- 6. सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
- 7. वन अधिकार प्रमाण पत्र।
- 8. सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी OBC, SC, ST या कोई भी जाति प्रमाण पत्र।
- 9. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, जहां भी मौजूद हो।
- 10. राज्य या स्थानीय निकायों द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर।
- 11. सरकार द्वारा जारी कोई भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र।
- 12. आधार, जिस पर आयोग का पत्र संख्या 23/2025-ERS/Vol.II दिनांक 9 सितंबर 2025 लागू होगा।
- 13. 1 जुलाई 2025 की अर्हता तिथि वाली बिहार SIR मतदाता सूची का उद्धरण।
आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
आधार को बारहवें दस्तावेज़ के रूप में सुप्रीम कोर्ट ने जोड़ा। 8 सितंबर 2025 के अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आधार अधिनियम के तहत आधार की वैधानिक स्थिति को देखते हुए, यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है और नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लेकिन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) के तहत आधार किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने वाले दस्तावेज़ों में से एक है। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि संशोधित सूची में शामिल करने या हटाने के लिए आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए, इसे 12वां दस्तावेज़ माना जाए, और कहा कि निर्वाचन आयोग किसी भी दूसरे दस्तावेज़ की तरह इसकी प्रामाणिकता और असलियत जांचने का हकदार है।
संक्षेप में: आधार यह साबित करता है कि आप कौन हैं। अपने आप में यह नागरिकता साबित नहीं करता, और गणना प्रपत्र में आधार संख्या वैकल्पिक है।
इनमें से कौन से ज़्यादातर बिहार और यूपी के उम्मीदवारों के पास पहले से हैं
इस सूची के कई दस्तावेज़ हमारे पाठकों के पास नौकरी के आवेदनों के लिए पहले से होते हैं: मैट्रिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास (आवासीय) प्रमाण पत्र। मैट्रिक प्रमाण पत्र में आपकी जन्म तिथि दर्ज होती है, जो ठीक वही है जिसे नियम साबित करने को कहता है।
यदि इनमें से किसी में तारीख या नाम गलत है, तो उस पर भरोसा करने से पहले उसे ठीक करा लें। मार्कशीट में जन्म तिथि सुधार, जाति प्रमाण पत्र और आवासीय प्रमाण पत्र पर हमारी गाइड इसका तरीका बताती हैं।
बिहार SIR सूची दूसरे राज्यों में भी मान्य है
13वां बिंदु साफ़ है: 1 जुलाई 2025 की अर्हता तिथि वाली बिहार SIR मतदाता सूची का उद्धरण दस्तावेज़ों की सूची में है। बिहार के उन लाखों लोगों के लिए जो अब दिल्ली, महाराष्ट्र या झारखंड में पंजीकृत हैं, जहां SIR का तीसरा चरण चल रहा है, बिहार SIR की प्रविष्टि दस्तावेज़ के रूप में इस्तेमाल हो सकती है।
दो व्यावहारिक नियम
मूल नहीं, स्व-सत्यापित प्रतियां दें, जब तक कोई अधिकारी मूल देखने को न कहे। और जो भी जमा करें उसकी पावती संभालकर रखें, क्योंकि यदि बाद में प्रारूप या अंतिम सूची में आपका नाम छूट जाए तो वही आपका रिकॉर्ड है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या SIR के लिए दस्तावेज़ चाहिए?
तभी, जब ERO आपको इसलिए नोटिस भेजें कि पिछली SIR सूची से आपका या किसी संबंधी का विवरण नहीं मिला या मेल नहीं खाया। यदि गणना प्रपत्र से यह जुड़ाव मिल जाए, तो दस्तावेज़ नहीं मांगे जाते।
मेरा जन्म 1995 में हुआ। कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
1 जुलाई 1987 और 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे होने पर एक दस्तावेज़ अपने लिए और एक पिता या माता के लिए चाहिए, हर एक जन्म तिथि और/या जन्म स्थान साबित करे।
क्या SIR में आधार मान्य है?
हां, पहचान के प्रमाण के रूप में, 12वें दस्तावेज़ के तौर पर, सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर 2025 के आदेश के तहत। उसी आदेश में लिखा है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, और निर्वाचन आयोग इसकी असलियत जांच सकता है।
क्या मेरा मैट्रिक प्रमाण पत्र मान्य दस्तावेज़ है?
हां। मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक या शैक्षणिक प्रमाण पत्र आधिकारिक सूची का 5वां बिंदु है।
क्या जाति प्रमाण पत्र मान्य है?
हां। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी OBC, SC, ST या कोई भी जाति प्रमाण पत्र आधिकारिक सूची का 8वां बिंदु है।
क्या दिल्ली में बिहार SIR की प्रविष्टि इस्तेमाल कर सकते हैं?
हां। 1 जुलाई 2025 की अर्हता तिथि वाली बिहार SIR मतदाता सूची का उद्धरण आधिकारिक दस्तावेज़ सूची का 13वां बिंदु है।
ℹ️ सरकारी नियम, शुल्क और समय-सीमा बदल सकते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने प्रखंड कार्यालय से वर्तमान स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें।
अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026