बिहार में महिलाओं का 35% क्षैतिज आरक्षण: BTSC के 1,129 में से 302 पद, और यह मिलता किसे है
Sarkari Naukri Khabar • बिहार
बिहार में पदों का 35 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित है, और अभी खुली चार BTSC भर्तियों में यह 1,129 में से 302 पद बनता है। लेकिन दो शर्तें तय करती हैं कि यह आपको सच में मिलेगा या नहीं, और दोनों हर साल लोगों को चूका देती हैं। यह आरक्षण केवल बिहार की मूल निवासी महिलाओं के लिए है, इसलिए दूसरे राज्य की महिला को नहीं मिलता। और आरक्षित कोटि का दावा करने वाली विवाहित महिला को प्रमाण पत्र पिता के नाम और पिता के पते से बनवाने होंगे, पति के नहीं। यह गाइड बताती है कि क्षैतिज आरक्षण कैसे काम करता है और क्या साथ लाना है।
क्षैतिज का मतलब क्या है, और यह क्यों मायने रखता है
बिहार में महिलाओं का 35 प्रतिशत क्षैतिज है, ऊर्ध्वाधर नहीं। अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग जैसा ऊर्ध्वाधर आरक्षण पदों का अलग खाना बनाता है। क्षैतिज आरक्षण हर खाने को काटता हुआ चलता है: अनारक्षित पदों का 35 प्रतिशत महिलाओं को, अनुसूचित जाति के पदों का 35 प्रतिशत अनुसूचित जाति की महिलाओं को, और इसी तरह आगे।
इसलिए आपको अपनी कोटि और महिला होने में से एक चुनना नहीं पड़ता। आप अपनी ही कोटि में मुकाबला करती हैं, और उसी के भीतर एक हिस्सा महिलाओं के लिए रखा जाता है। बिहार की अनारक्षित महिला अनारक्षित महिलाओं के हिस्से में गिनी जाती है, किसी अलग सूची में नहीं जाती।
चार खुली भर्तियों के आँकड़े
हर विज्ञापन अपनी कोटिवार पंक्ति के नीचे महिलाओं की पंक्ति अलग से छापता है, और चारों का जोड़ इस तरह है।
- विज्ञापन 27/2026, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी: 787 में से 190 पद
- विज्ञापन 28/2026, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी: 231 में से 77 पद
- विज्ञापन 29/2026, खाद्य संरक्षा अधिकारी: 105 में से 34 पद
- विज्ञापन 30/2026, वैज्ञानिक सहायक: 6 में से 1 पद
- कुल मिलाकर: 1,129 में से 302 पद
केवल बिहार की मूल निवासी महिलाओं के लिए
विज्ञापन साफ़ कहते हैं कि आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जिनका स्थायी निवास बिहार में है। यह महिलाओं के 35 प्रतिशत पर उतना ही लागू है जितना जातिगत आरक्षण पर।
उत्तर प्रदेश, झारखंड या कहीं और की महिला अनारक्षित के रूप में आवेदन करेगी और उसे सामान्य अर्हतांक 40 प्रतिशत चाहिए, न कि बिहार की मूल निवासी महिलाओं को मिलने वाला 32 प्रतिशत। ऑनलाइन आवेदन में भरा गया स्थायी पता ही इस प्रयोजन के लिए स्थायी निवास माना जाता है।
विवाहित महिलाएँ: प्रमाण पत्र पिता के नाम से बनेंगे
बिहार की भर्तियों में महिला का आरक्षण दावा फेल होने का सबसे आम कारण यही है। आरक्षित कोटि का दावा करने वाली विवाहित महिला को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र पिता के नाम और पिता के स्थायी पते से बनवाने होंगे।
पति के नाम से या पति के पते से बना प्रमाण पत्र जाति के दावे के लिए स्वीकार नहीं होता। यह औपचारिकता नहीं है: दस्तावेज़ सत्यापन में इसकी जाँच होती है, और उस समय गलत नाम वाला प्रमाण पत्र बदला नहीं जा सकता।
विवाहित महिला के लिए EWS का अपवाद
एक प्रमाण पत्र उल्टा चलता है। पति के साथ रहने वाली विवाहित महिला जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का दावा करती है, तो आय एवं परिसंपत्ति प्रमाण पत्र पति के स्थायी निवास से जारी होता है।
साथ में उसे पिता के स्थायी निवास के आधार पर बना आवास प्रमाण पत्र भी देना होगा, ताकि स्पष्ट हो कि वह बिहार की मूल निवासी है। एक ही दावे के लिए दो पतों से दो प्रमाण पत्र।
फॉर्म में दावा करें, वरना लाभ नहीं
विज्ञापन कहते हैं कि ऑनलाइन आवेदन के निर्धारित कॉलम में आरक्षण का दावा न करने पर उसका लाभ नहीं मिलेगा। बाद में दावा जोड़ने का कोई रास्ता नहीं है।
फॉर्म भरते समय सक्षम प्राधिकार का प्रमाण पत्र आपके पास होना भी ज़रूरी है। पहले आवेदन और बाद में प्रमाण पत्र, ऐसा प्रावधान नहीं है, और प्रमाण पत्र विज्ञापन की अंतिम तिथि तक निर्गत होना चाहिए।
किस कार्यालय से बनेगा
विज्ञापन जारी करने वाले प्राधिकार का नाम देते हैं, और गलत कार्यालय से बना प्रमाण पत्र उतना ही अस्वीकार होता है जितना गलत नाम वाला।
- अनुसूचित जाति और जनजाति: बिहार सरकार द्वारा अधिसूचित अंचलाधिकारी से जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग: अधिसूचित अंचल अधिकारी से क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र, बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ बना हुआ
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग: निर्धारित प्रारूप में आय एवं परिसंपत्ति प्रमाण पत्र, जो जारी होने की तिथि से एक वर्ष तक मान्य है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
BTSC 2026 की भर्तियों में महिलाओं के लिए कितने पद आरक्षित हैं?
1,129 में से 302 पद: विज्ञापन 27 में 190, विज्ञापन 28 में 77, विज्ञापन 29 में 34 और विज्ञापन 30 में 1।
मैं उत्तर प्रदेश की महिला हूँ। क्या बिहार में 35 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा?
नहीं। इन विज्ञापनों में आरक्षण, महिलाओं के 35 प्रतिशत सहित, केवल बिहार के मूल निवासियों के लिए है। आप अनारक्षित के रूप में आवेदन करेंगी और 40 प्रतिशत चाहिए।
मैं विवाहित हूँ। क्या जाति प्रमाण पत्र पति के नाम से होना चाहिए?
नहीं। जाति, निवास या क्रीमीलेयर रहित दावे के लिए यह पिता के नाम और पिता के स्थायी पते से बना होना चाहिए।
कौन-सा प्रमाण पत्र पति के पते से बनता है?
केवल EWS का आय एवं परिसंपत्ति प्रमाण पत्र, जब विवाहित महिला पति के साथ रहती हो। साथ में पिता के स्थायी निवास के आधार पर आवास प्रमाण पत्र भी देना होगा।
आरक्षण का कॉलम भरना भूल गई। क्या बाद में जोड़ सकती हूँ?
नहीं। विज्ञापन कहते हैं कि ऑनलाइन आवेदन के निर्धारित कॉलम में दावा न करने पर लाभ नहीं मिलेगा।
क्या महिला होने का मतलब है कि मैं अलग सूची में मुकाबला करूँगी?
नहीं। क्षैतिज आरक्षण आपकी अपनी कोटि के भीतर काम करता है। आप अपनी कोटि में मुकाबला करती हैं, और उसी के भीतर 35 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए रखा जाता है।
ℹ️ सरकारी नियम, शुल्क और समय-सीमा बदल सकते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने प्रखंड कार्यालय से वर्तमान स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें।
अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026