बिहार नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र — ऑनलाइन आवेदन और फॉर्म
Sarkari Naukri Khabar • बिहार
बिहार में नॉन क्रीमी लेयर के दो अलग-अलग प्रमाण पत्र बनते हैं, और गलत वाला लगा देना पिछड़ा वर्ग तथा अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के दस्तावेज़ सत्यापन में असफल होने के सबसे आम कारणों में से एक है। एक भारत सरकार के प्रयोजनार्थ होता है (बैंक, रेलवे, एसएससी) और दूसरा बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ। दोनों के लिए आवेदन serviceonline.bihar.gov.in पर होता है, दोनों अंचलाधिकारी द्वारा 10 कार्य दिवसों में निर्गत होते हैं, और दोनों ही तत्काल सेवा में शामिल नहीं हैं। तत्काल सेवा केवल जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र के लिए है। यह गाइड बताती है कि आपको कौन सा प्रमाण पत्र चाहिए, किस फॉर्म से, कब तक मान्य रहेगा, और विवाहित महिलाओं के आवेदन किस नियम पर अस्वीकृत होते हैं।
संक्षेप में
बिहार में नॉन क्रीमी लेयर के दो प्रमाण पत्र बनते हैं, एक नहीं। आपको कौन सा चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि भर्ती कौन कर रहा है। आपकी जाति पर नहीं।
दोनों के लिए आवेदन एक ही पोर्टल serviceonline.bihar.gov.in पर सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत होता है, और दोनों अंचलाधिकारी द्वारा 10 कार्य दिवसों में निर्गत किए जाते हैं।
- केंद्रीय भर्ती के लिए (आईबीपीएस, आरआरबी, एसएससी, यूपीएससी) भारत सरकार के प्रयोजनार्थ निर्गत ओ.बी.सी. (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र चाहिए
- बिहार की भर्ती के लिए (बीपीएससी, बीएसएससी, बीपीएसएससी, सीएसबीसी) बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ निर्गत पिछड़ा वर्ग / अत्यंत पिछड़ा वर्ग (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र चाहिए
- तत्काल सेवा यहां काम नहीं आएगी। वह केवल जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र के लिए है
सबसे महंगी पड़ने वाली गलती
उम्मीदवार को दोनों प्रमाण पत्र लगभग एक जैसे दिखते हैं। लेकिन वे अलग-अलग फॉर्म पर, अलग नियमों के तहत निर्गत होते हैं, और आयोग यह देखता है कि आप कौन सा लाए हैं।
जो उम्मीदवार आईबीपीएस में बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ वाला प्रमाण पत्र लगाता है, उसने बिना वैध प्रमाण के आरक्षण का दावा किया है। दस्तावेज़ सत्यापन में वह दावा गिर जाता है, और उसके साथ उम्मीदवारी भी, वह भी लिखित परीक्षा पास करने के बाद।
यदि आप केंद्र और राज्य दोनों की भर्तियों में बैठते हैं तो आपको दोनों प्रमाण पत्र चाहिए। ये एक ही पोर्टल पर दो अलग आवेदन हैं।
कौन सा प्रमाण पत्र, कौन सा फॉर्म
ये फॉर्म संख्याएं सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रकाशित लोक सेवाओं के अधिकार की सेवा-सूची से हैं।
- भारत सरकार के प्रयोजनार्थ: आवेदन फॉर्म-VI पर, स्वयं शपथ-पत्र फॉर्म-VIII पर। प्रमाण पत्र फॉर्म-VII पर निर्गत होता है
- बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ: आवेदन फॉर्म-IX पर, स्वयं शपथ-पत्र फॉर्म-XI पर। प्रमाण पत्र फॉर्म-X पर निर्गत होता है
- दोनों अंचल, अनुमंडल और जिला स्तर पर उपलब्ध हैं। भर्तियों के लिए सामान्यतः अंचल स्तर पर्याप्त होता है
कितना समय लगता है
दोनों में से किसी भी प्रमाण पत्र के लिए अंचलाधिकारी स्तर पर 10 कार्य दिवस। कार्य दिवस में रविवार और सरकारी अवकाश नहीं गिने जाते, इसलिए व्यवहार में लगभग दो सप्ताह मानकर चलें।
तत्काल का कोई रास्ता नहीं है। बिहार की दो दिन वाली तत्काल सेवा जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र तक सीमित है, और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र उस सूची में नहीं है। यदि आपका दस्तावेज़ सत्यापन एक सप्ताह में है तो यही तथ्य भारी पड़ेगा।
सेवा-सूची में इन प्रमाण पत्रों के लिए कोई सरकारी शुल्क अंकित नहीं है। साइबर कैफे या सी.एस.सी. जो लेता है वह उसका अपना टाइपिंग शुल्क है, सरकारी शुल्क नहीं।
वैधता: वह पेच जो कोई नहीं बताता
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र हमेशा के लिए नहीं चलता, और हर भर्ती संस्था अलग सीमा तय करती है। अधिसूचना पढ़ें, किसी फोरम पर भरोसा न करें।
आईबीपीएस ने CRP CSA-XVI अधिसूचना में कहा है कि ओबीसी प्रमाण पत्र भारत सरकार के प्रारूप में नॉन-क्रीमी-लेयर खंड सहित हो और 1 अप्रैल 2026 को या उसके बाद निर्गत हो, तथा दस्तावेज़ सत्यापन की तिथि तक वैध हो।
सीएसबीसी ने विज्ञापन 01/2026 में पुराना प्रमाण पत्र स्वीकार किया है, पर एक शर्त के साथ: यदि नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र एक वर्ष से पुराना है तो सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र संख्या 15440 दिनांक 5 दिसंबर 2017 के अनुसार फॉर्म xviiiB पर घोषणा-पत्र भी संलग्न करना अनिवार्य होगा।
- जिस भर्ती में आवेदन कर रहे हैं, हर बार उसकी अधिसूचना का सटीक शब्द पढ़ें
- जहां अधिसूचना कोई तिथि बताती है कि उसके बाद निर्गत होना चाहिए, वहां पुराना प्रमाण पत्र बिल्कुल मान्य नहीं होगा
- आवेदन की अंतिम तिथि के बाद निर्गत प्रमाण पत्र प्रायः अस्वीकार कर दिया जाता है, भले ही बाकी सब सही हो
विवाहित महिलाएं: आवेदन से पहले यह पढ़ें
इस क्षेत्र में सबसे अधिक उम्मीदवारियां इसी एक नियम पर समाप्त होती हैं, और हर वर्ष लोग इससे चौंकते हैं।
आरक्षण का दावा करने वाली विवाहित महिला के जाति एवं नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र उसके पिता के नाम और पते से निर्गत होने चाहिए, पति के नाम से नहीं। सीएसबीसी ने विज्ञापन 01/2026 में यह स्पष्ट लिखा है।
कारण यह है कि जाति जन्म से तय होती है, विवाह से नहीं। पति के परिवार के आधार पर बना प्रमाण पत्र उम्मीदवार की अपनी कोटि का प्रमाण नहीं माना जाता, चाहे परिवार की स्थिति कितनी ही वास्तविक क्यों न हो।
यदि आप क्रीमी लेयर में हैं
जिस उम्मीदवार का परिवार क्रीमी लेयर में आता है, वह ओबीसी आरक्षण का हकदार नहीं है और उसे सामान्य श्रेणी में आवेदन करना होगा। आईबीपीएस ने यह स्पष्ट शब्दों में लिखा है।
वैध नॉन-क्रीमी-लेयर प्रमाण पत्र के बिना ओबीसी में आवेदन करना कागज़ी चूक नहीं है। यह कोटि का गलत दावा है, और फॉर्म बंद होने के बाद किसी दूसरी कोटि में विचार करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाता।
जहां संशोधन विंडो होती भी है, वहां भी प्रायः कोटि बदलने की अनुमति नहीं होती। निर्णय जमा करने से पहले लें।
यदि कार्यालय समय-सीमा चूक जाए
ये बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाएं हैं, इसलिए समय-सीमा बाध्यकारी है। यदि 10 कार्य दिवस बीत जाएं और प्रमाण पत्र न मिले तो यह केवल शिकायत नहीं, आपका कानूनी अधिकार है।
अपील अनुमंडल पदाधिकारी के पास होगी, जिनके लिए 15 कार्य दिवस निर्धारित हैं। उसके आगे पुनर्विलोकन जिलाधिकारी के पास, वह भी 15 कार्य दिवस।
अपील उसी पोर्टल से करें, अपनी आवेदन संख्या और आवेदन की तिथि के साथ। आवेदन संख्या संभालकर रखें। उसके बिना न स्थिति देखी जा सकती है, न अपील की जा सकती है।
जिन गलतियों पर आवेदन अस्वीकृत होते हैं
- केंद्रीय भर्ती में बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ वाला प्रमाण पत्र लगाना, या इसका उल्टा
- यह मान लेना कि तत्काल से दो दिन में बन जाएगा। इस प्रमाण पत्र पर तत्काल लागू नहीं है
- अधिसूचना की अनुमति से पुराना प्रमाण पत्र, और जहां आवश्यक है वहां फॉर्म xviiiB घोषणा-पत्र न लगाना
- विवाहित महिला का प्रमाण पत्र पिता के बजाय पति के नाम से बनवाना
- नाम या पिता के नाम की वर्तनी आधार तथा मैट्रिक प्रमाण पत्र से भिन्न होना
- दस्तावेज़ सत्यापन से एक सप्ताह पहले आवेदन देना: 10 कार्य दिवस लगभग दो सप्ताह होते हैं
- क्रीमी लेयर में होते हुए फॉर्म में ओबीसी का दावा करना। बाद में कोटि नहीं बदली जा सकती
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बिहार में नॉन क्रीमी लेयर के दो अलग प्रमाण पत्र बनते हैं?
हां। एक भारत सरकार के प्रयोजनार्थ और दूसरा बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ निर्गत होता है, और ये एक ही पोर्टल पर दो अलग आवेदन हैं। आपको कौन सा चाहिए, यह इस पर निर्भर करता है कि भर्ती कौन कर रहा है। आपकी जाति पर नहीं।
बैंक या रेलवे की परीक्षा के लिए कौन सा एनसीएल प्रमाण पत्र चाहिए?
भारत सरकार के प्रयोजनार्थ वाला: आवेदन फॉर्म-VI पर, और प्रमाण पत्र फॉर्म-VII पर निर्गत होता है। आईबीपीएस, आरआरबी, एसएससी और यूपीएससी केंद्रीय भर्तियां हैं।
बिहार की भर्ती के लिए कौन सा एनसीएल प्रमाण पत्र चाहिए?
बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ वाला: आवेदन फॉर्म-IX पर, और प्रमाण पत्र फॉर्म-X पर निर्गत होता है। बीपीएससी, बीएसएससी, बीपीएसएससी और सीएसबीसी राज्य की भर्तियां हैं।
एनसीएल प्रमाण पत्र में कितना समय लगता है, क्या तत्काल है?
अंचलाधिकारी स्तर पर 10 कार्य दिवस। तत्काल का कोई रास्ता नहीं है: दो दिन वाली तत्काल सेवा केवल जाति, आवासीय और आय प्रमाण पत्र तक सीमित है, और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र उस सूची में नहीं है।
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र कितना पुराना चल सकता है?
यह अधिसूचना पर निर्भर करता है, इसलिए हर बार पढ़ें। आईबीपीएस CRP CSA-XVI ने 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद निर्गत होना अनिवार्य किया, जबकि सीएसबीसी विज्ञापन 01/2026 ने पुराना भी स्वीकार किया बशर्ते फॉर्म xviiiB पर घोषणा-पत्र संलग्न हो।
क्या विवाहित महिला पति के नाम का एनसीएल प्रमाण पत्र दे सकती है?
नहीं। उसके जाति एवं नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र पिता के नाम और पते से निर्गत होने चाहिए। सीएसबीसी ने विज्ञापन 01/2026 में यह स्पष्ट लिखा है।
ℹ️ सरकारी नियम, शुल्क और समय-सीमा बदल सकते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने प्रखंड कार्यालय से वर्तमान स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें।
अंतिम अपडेट: 23 अगस्त 2026