बिहार में स्वतंत्रता सेनानियों के पोता-पोती का 2% आरक्षण: कौन पात्र है और कौन-सा प्रमाण पत्र
Sarkari Naukri Khabar • बिहार
बिहार में स्वतंत्रता सेनानियों के पोता-पोती-नाती-नतीनी के लिए 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण है, और अभी खुली चार BTSC भर्तियों में मिलाकर ऐसे 17 पद हैं। यह राज्य के सबसे कम समझे जाने वाले आरक्षणों में है, और दस्तावेज़ सत्यापन में एक ही कारण से बार-बार फेल होता है: उम्मीदवार स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी का परिचय पत्र ले आते हैं, जिसे विज्ञापन मान्य नहीं मानते। यह गाइड बताती है कि कौन पात्र है, कौन-सा प्रमाण पत्र चाहिए और वह किस कार्यालय से बनता है।
यह आरक्षण है क्या
सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 13185, दिनांक 3 सितंबर 2015 के आलोक में बिहार राज्य के उन स्वतंत्रता सेनानियों, जिन्हें केंद्र द्वारा पेंशन स्वीकृत है, के पोता-पोती-नाती-नतीनी को नियमानुसार 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देय है। BPSC ने विज्ञापन 14/2026 में यह कहा है और BTSC के विज्ञापनों में भी यही प्रावधान है।
क्षैतिज का अर्थ है कि यह कोटियों को काटता हुआ चलता है, अलग खाना नहीं बनाता। आप अपनी ही कोटि में मुकाबला करते हैं; उसी के भीतर एक हिस्सा रखा जाता है।
कौन-सा रिश्ता पात्र है
विज्ञापन इसे ठीक-ठीक नाम देते हैं: पोता, पोती, नाती और नतीनी। यानी बेटे का बेटा, बेटे की बेटी, बेटी का बेटा और बेटी की बेटी। बेटे या बेटी, दोनों से होकर आने वाले नाती-पोते।
यह ख़ासकर पोते-नाती की पीढ़ी है। विज्ञापन इसे उससे आगे नहीं बढ़ाते, और उस रिश्ते से बाहर के दावे का कोई प्रावधान नहीं है।
जो प्रमाण पत्र फेल होता है, और जो चलता है
यही हिस्सा लोगों का पद ले लेता है। विज्ञापन कहते हैं कि स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी होने का परिचय पत्र प्रमाण के रूप में मान्य नहीं है। कई परिवारों के पास यही होता है और वे उसे ही दस्तावेज़ मान लेते हैं। वह नहीं है।
चाहिए यह: विहित प्रपत्र में, आवेदन के साथ संलग्न, आपके गृह जिला के जिला पदाधिकारी या उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी के हस्ताक्षर से निर्गत प्रमाण पत्र, जो प्रमाणित करे कि आप उस स्वतंत्रता सेनानी के पोता, पोती, नाती या नतीनी हैं।
- निर्गत करने वाला प्राधिकार: आपके गृह जिला के जिला पदाधिकारी, या उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी
- प्रपत्र: सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 11687, दिनांक 30 अगस्त 2016 के साथ संलग्न विहित प्रपत्र
- समय: आवेदन के समय उपलब्ध होना चाहिए, बाद में बनवाया हुआ नहीं
- मान्य नहीं: स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी होने का परिचय पत्र
केवल बिहार के मूल निवासी
इन विज्ञापनों के हर दूसरे आरक्षण की तरह यह भी बिहार के मूल निवासियों के लिए है, और पेंशन केंद्र द्वारा किसी बिहार के स्वतंत्रता सेनानी को स्वीकृत होनी चाहिए। BTSC के विज्ञापन इस कॉलम पर स्पष्ट रूप से बिहार राज्य के मूलवासी हेतु लिखते हैं।
चार खुली BTSC भर्तियों में पद
चारों विज्ञापन अपनी रिक्ति तालिका में यह कॉलम अलग से छापते हैं।
- विज्ञापन 27/2026, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी: 787 में से 11 पद
- विज्ञापन 28/2026, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी: 231 में से 4 पद
- विज्ञापन 29/2026, खाद्य संरक्षा अधिकारी: 105 में से 2 पद
- विज्ञापन 30/2026, वैज्ञानिक सहायक: कोई नहीं
- कुल मिलाकर: जिन तीन में हैं, उनमें 17 पद
फॉर्म में दावा करें
इन विज्ञापनों के हर आरक्षण की तरह, दावा ऑनलाइन आवेदन के निर्धारित कॉलम में करना होगा। विज्ञापन कहते हैं कि वहाँ दावा न करने पर कोई लाभ नहीं मिलेगा, और बाद में जोड़ने का रास्ता नहीं है।
BPSC का विज्ञापन यह भी कहता है कि नियुक्ति प्रक्रिया के बीच आरक्षित कोटि में बदलाव नहीं किया जा सकता, इसलिए फॉर्म में की गई प्रविष्टि ही आप पर लागू रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार में स्वतंत्रता सेनानी का आरक्षण किसे मिलता है?
उन बिहार के स्वतंत्रता सेनानियों के पोता, पोती, नाती और नतीनी को, जिन्हें केंद्र द्वारा पेंशन स्वीकृत है। यह 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण है।
क्या स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी का परिचय पत्र काफ़ी है?
नहीं। विज्ञापन कहते हैं कि वह मान्य नहीं है। विहित प्रपत्र में जिला पदाधिकारी के हस्ताक्षर से निर्गत प्रमाण पत्र चाहिए।
प्रमाण पत्र किस कार्यालय से बनता है?
आपके गृह जिला के जिला पदाधिकारी या उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी से, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 11687, दिनांक 30 अगस्त 2016 के साथ संलग्न प्रपत्र में।
खुली BTSC भर्तियों में ऐसे कितने पद हैं?
17: विज्ञापन 27/2026 में ग्यारह, विज्ञापन 28/2026 में चार और विज्ञापन 29/2026 में दो। विज्ञापन 30/2026 में कोई नहीं।
क्या परपोता दावा कर सकता है?
विज्ञापन केवल पोता, पोती, नाती, नतीनी की पीढ़ी का नाम लेते हैं। उससे आगे का कोई प्रावधान नहीं है।
ℹ️ सरकारी नियम, शुल्क और समय-सीमा बदल सकते हैं। कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल या अपने प्रखंड कार्यालय से वर्तमान स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें।
अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026